आधुनिकता की दौड़ में, रबारी-राईका समुदाय की अमिट पहचान: पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति
"Preserving an unfading heritage in a modern world: the traditional attire and folk culture of the Rabari-Raika community."
ब्लॉग : एम फारूक सूमरो
आधुनिक फैशन की चकाचौंध और होड़ में भी, राजस्थान का रबारी (राईका) समुदाय अपनी जड़ों से अटूट जुड़ाव का एक शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह समुदाय आज भी गर्व और श्रद्धा के साथ अपनी पारंपरिक वेशभूषा और समृद्ध लोक संस्कृति को थामे हुए है, जो इन्हें भीड़ में एक विशिष्ट और अलग पहचान दिलाती है।
ग्रामीण जीवन और पारंपरिक व्यवसाय
रबारी समुदाय के अधिकांश लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जहाँ उनका मुख्य व्यवसाय पशुपालन और खेती से संबंधित कार्य है। जीवन की यह सादगी और मिट्टी से जुड़ाव ही इन्हें अपनी परंपराओं को सहेजने की प्रेरणा देता है।
फैशन के युग में लोक-संस्कृति का गौरव
इस मॉडर्न ज़माने और फैशन के युग में भी, जब अन्य समाजों में पश्चिमी वेशभूषा का चलन बढ़ा है, रबारी-राईका समुदाय के लोग अपने शादी-विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक परम्परा, खान-पान, और रीति-रिवाजों को पूरी निष्ठा से अपनाते हैं।
पहनावा: महिलाएँ और पुरुष दोनों ही अपनी पारंपरिक वेशभूषा को अपनाए हुए हैं, जो उनकी संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक है।
रीति-रिवाज: उनके खान-पान, रीति-रिवाज, और लोक गायन में उनकी मौलिकता स्पष्ट दिखाई देती है।
विशेष पहचान: ऊंट सवारी करना आज भी उनकी जीवनशैली और लोक परम्परा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रबारी-राईका समुदाय का अपनी लोक संस्कृति से यह गहरा जुड़ाव ही उनकी सबसे खास पहचान बन चुका है। अपनी परम्परा और संस्कृति पर गर्व महसूस करने का उनका यह तरीका उन्हें न केवल एक अनूठी पहचान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
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